समय क्या है?

पश्चिमी विज्ञान कहता है — समय एक रेखा है। अतीत से भविष्य की ओर चलती हुई।

भारतीय दर्शन कहता है — समय एक चक्र है। सूर्य, चंद्रमा, और ग्रहों की गति से बना — निरंतर, लयबद्ध, और अर्थपूर्ण।

इसी चक्र को मापने और समझने की प्रणाली है — पंचांग (Panchanga)।

कालः पचति भूतानि, कालः संहरते प्रजाः। कालः सुप्तेषु जागर्ति, कालो हि दुरतिक्रमः।।

— महाभारत, वनपर्व

काल ही सबको पकाता है, काल ही सबको समेटता है। जो सोते हैं उनमें भी काल जागता रहता है — और काल को पार करना सबसे कठिन है।

पंचांग क्या है?

What is Panchanga?

पंचांग दो शब्दों से बना है — पञ्च (पाँच) और अंग (अंग / भाग)।

अर्थात् — पाँच अंगों वाला।

पंचांग वह भारतीय कैलेंडर है जो पाँच खगोलीय तत्त्वों के आधार पर प्रत्येक दिन का विवरण देता है। यह केवल तिथि बताने वाला कैलेंडर नहीं — यह समय की गुणवत्ता बताने वाला शास्त्र है।

प्रत्येक दिन के पाँच अंग हैं —

अंग English आधार
वार (Vara) Weekday सूर्योदय से सूर्योदय
तिथि (Tithi) Lunar Day सूर्य-चंद्र का कोण
नक्षत्र (Nakshatra) Star चंद्रमा की राशि-स्थिति
योग (Yoga) Luni-Solar Day सूर्य और चंद्र की संयुक्त गति
करण (Karana) Half Lunar Day तिथि का आधा भाग

इन पाँचों को जानकर — किसी भी दिन की खगोलीय और ज्योतिषीय स्थिति पूरी तरह समझी जा सकती है।

पाँच अंग — एक-एक को समझें

वार (Vara) — सप्ताह के दिन और होरा

सप्ताह के सात दिन — और प्रत्येक दिन का एक स्वामी ग्रह।

वार Hindi English स्वामी ग्रह
रविवार Ravivar Sunday सूर्य (Sun)
सोमवार Somavar Monday चंद्र (Moon)
मंगलवार Mangalvar Tuesday मंगल (Mars)
बुधवार Budhvar Wednesday बुध (Mercury)
बृहस्पतिवार Brihaspativar Thursday बृहस्पति (Jupiter)
शुक्रवार Shukravar Friday शुक्र (Venus)
शनिवार Shanivar Saturday शनि (Saturn)

यह केवल भारतीय परंपरा नहीं — पूरी दुनिया के सप्ताह के दिन इन्हीं ग्रहों पर आधारित हैं। Sunday = Sun, Monday = Moon, Tuesday = Mars (Norse — Tiw/Tyr), Wednesday = Mercury (Woden), Thursday = Jupiter (Thor), Friday = Venus (Freya), Saturday = Saturn।

होरा (Hora) — दिन के चौबीस खंड

प्रत्येक दिन को 24 होराओं (Horas) में बाँटा जाता है — प्रत्येक होरा लगभग एक घंटे की।

प्रत्येक होरा का एक स्वामी ग्रह होता है। और प्रत्येक दिन की पहली होरा उस दिन के वार-स्वामी की होती है।

होरा-क्रम एक निश्चित अनुक्रम में चलता है —

सूर्य → शुक्र → बुध → चंद्र → शनि → बृहस्पति → मंगल → सूर्य...

यह अनुक्रम ग्रहों की भूकेंद्रीय कक्षीय गति के घटते क्रम पर आधारित है — शनि (सबसे धीमे) से चंद्र (सबसे तेज़) तक।

वार प्रथम होरा द्वितीय होरा तृतीय होरा
रविवार सूर्य शुक्र बुध
सोमवार चंद्र शनि बृहस्पति
मंगलवार मंगल सूर्य शुक्र
बुधवार बुध चंद्र शनि
बृहस्पतिवार बृहस्पति मंगल सूर्य
शुक्रवार शुक्र बुध चंद्र
शनिवार शनि बृहस्पति मंगल

होरा का व्यावहारिक उपयोग —

जिस ग्रह की होरा चल रही हो — उस ग्रह से संबंधित कार्य उस समय अधिक फलदायी होते हैं।

सूर्य होरा — सरकारी कार्य, अधिकार, नेतृत्व के लिए

चंद्र होरा — यात्रा, कृषि, माता से संबंधित कार्य के लिए

बुध होरा — व्यापार, लेखन, संचार के लिए

बृहस्पति होरा — शिक्षा, धर्म, शुभारंभ के लिए

शुक्र होरा — कला, विवाह, सौंदर्य संबंधी कार्य के लिए

मंगल होरा — साहस, निर्माण, शल्य-चिकित्सा के लिए

शनि होरा — कठिन परिश्रम, सेवा, दीर्घकालिक कार्य के लिए

JyotishTara पर — आप किसी भी समय की होरा देख सकते हैं।

२. तिथि (Tithi) — चंद्र दिवस

तिथि सूर्य और चंद्रमा के बीच के कोणीय अंतर (Angular Distance) से बनती है। जब यह अंतर 12 अंश बढ़ता है — एक तिथि पूरी होती है। एक पक्ष में 15 तिथियाँ होती हैं।

तिथियों के पाँच प्रकार

तिथियों को उनके स्वभाव के अनुसार पाँच वर्गों में बाँटा गया है —

प्रकार तिथि संख्या स्वभाव उपयुक्त कार्य
नंदा (Nanda) 1, 6, 11 आनंददायक उत्सव, आनंद, नए कार्य
भद्रा (Bhadra) 2, 7, 12 शुभ स्थायी कार्य, निर्माण
जया (Jaya) 3, 8, 13 विजय प्रतिस्पर्धा, संघर्ष, युद्ध
रिक्ता (Rikta) 4, 9, 14 रिक्त / खाली नए कार्य वर्जित — केवल नित्यकर्म
पूर्णा (Poorna) 5, 10, 15 पूर्ण सभी शुभ कार्य

रिक्ता तिथियाँ (4, 9, 14) — चतुर्थी, नवमी, और चतुर्दशी — इन्हें सामान्यतः नए शुभ कार्यों के लिए टाला जाता है। पूर्णा तिथियाँ सर्वाधिक शुभ मानी जाती हैं।

उदया तिथि (Udaya Tithi) — सूर्योदय की तिथि

भारतीय पंचांग में उदया तिथि का विशेष महत्त्व है।

उदया तिथि वह तिथि है जो सूर्योदय के समय चल रही हो। वही तिथि उस पूरे दिन की मानी जाती है — चाहे वह दिन में बदल जाए।

उदाहरण — यदि सूर्योदय के समय पंचमी चल रही है और दोपहर को षष्ठी शुरू हो जाती है — तो वह दिन पंचमी का माना जाएगा। त्योहार, व्रत, और मुहूर्त उदया तिथि के अनुसार ही निर्धारित होते हैं।

तिथि क्षय (Tithi Kshaya) — लुप्त तिथि

कभी-कभी एक तिथि एक सूर्योदय के बाद शुरू होकर अगले सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाती है।

अर्थात् वह तिथि किसी भी सूर्योदय के समय उपस्थित नहीं थी।

इसे तिथि क्षय (Tithi Kshaya) या क्षय तिथि कहते हैं। पंचांग में वह तिथि उस दिन नहीं गिनी जाती — वह लुप्त हो जाती है।

नवरात्रि में कम या अधिक दिन क्यों?

यह प्रश्न हर वर्ष उठता है।

नवरात्रि में 8 दिन — यदि नवरात्रि के दौरान कोई तिथि क्षय हो जाए — अर्थात् एक तिथि किसी सूर्योदय पर उपस्थित न हो — तो नवरात्रि एक दिन कम होती है। 8-दिन की नवरात्रि इसी कारण होती है।

नवरात्रि में 10 दिन — यदि कोई तिथि दो सूर्योदयों पर उपस्थित हो — अर्थात् वह दो दिन चले — तो नवरात्रि एक दिन अधिक होती है। 10-दिन की नवरात्रि इसी कारण होती है।

यह कोई गलती नहीं — यह पंचांग की शुद्धता का प्रमाण है। चंद्रमा की गति के अनुसार तिथियाँ घटती-बढ़ती हैं — और पंचांग उसी का अनुसरण करता है।

३. नक्षत्र (Nakshatra) — चंद्र की स्थिति

चंद्रमा जिस नक्षत्र में हो — वह उस दिन का नक्षत्र है।

एक महत्त्वपूर्ण सुधार —

चंद्रमा एक नक्षत्र (13°20') को लगभग एक दिन में पार करता है — और एक राशि (30°) को लगभग सवा दो दिन (2.3-2.5 दिन) में।

इसीलिए 27 नक्षत्रों का पूरा चक्र लगभग 27 दिन में पूरा होता है — जो चंद्रमा के नाक्षत्रिक मास (Sidereal Month — 27.3 दिन) के बराबर है।

27 नक्षत्रों के नाम

क्र. नक्षत्र English क्र. नक्षत्र English
1 अश्विनी Ashwini 15 स्वाती Swati
2 भरणी Bharani 16 विशाखा Vishakha
3 कृत्तिका Krittika 17 अनुराधा Anuradha
4 रोहिणी Rohini 18 ज्येष्ठा Jyeshtha
5 मृगशिरा Mrigashira 19 मूल Mula
6 आर्द्रा Ardra 20 पूर्वाषाढ़ा Purva Ashadha
7 पुनर्वसु Punarvasu 21 उत्तराषाढ़ा Uttara Ashadha
8 पुष्य Pushya 22 श्रवण Shravana
9 आश्लेषा Ashlesha 23 धनिष्ठा Dhanishtha
10 मघा Magha 24 शतभिषा Shatabhisha
11 पूर्वफाल्गुनी Purva Phalguni 25 पूर्वभाद्रपदा Purva Bhadrapada
12 उत्तरफाल्गुनी Uttara Phalguni 26 उत्तरभाद्रपदा Uttara Bhadrapada
13 हस्त Hasta 27 रेवती Revati
14 चित्रा Chitra      

इन 27 नक्षत्रों पर विस्तृत अध्ययन आगे की श्रृंखला में होगा।

अभिजित नक्षत्र (Abhijit Nakshatra) — 28वाँ नक्षत्र

यह ज्योतिष का एक अत्यंत रोचक और कम चर्चित विषय है।

अभिजित एक विशेष नक्षत्र है जो उत्तराषाढ़ा और श्रवण के बीच स्थित है।

स्थिति — मकर राशि के 6°40' से 10°53'20" के बीच।

तारा — अभिजित वही तारा है जिसे पश्चिमी खगोल में वेगा (Vega) कहते हैं — वही जो भविष्य में हमारा अगला ध्रुव तारा बनेगा (लगभग 14,000 CE में)। हमने यह पृथ्वी वाले लेख में पढ़ा था।

27 में क्यों नहीं?

विंशोत्तरी दशा प्रणाली 27 नक्षत्रों पर आधारित है — और 360° को 27 बराबर भागों में बाँटने पर प्रत्येक का 13°20' होता है। अभिजित इस गणितीय विभाजन में पूरी तरह फिट नहीं होता क्योंकि यह उत्तराषाढ़ा के अंतिम भाग और श्रवण के प्रारंभिक भाग को कुछ अंशों तक ओवरलैप करता है।

इसीलिए दशा गणना में अभिजित को नहीं गिना जाता।

पर मुहूर्त में अभिजित अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।

अभिजित मुहूर्त (Abhijit Muhurta) — प्रत्येक दिन मध्याह्न (Midday) के आसपास लगभग 48 मिनट का एक काल होता है जो अभिजित मुहूर्त कहलाता है। यह दिन का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त माना जाता है — किसी भी शुभ कार्य के लिए।

महाभारत में भी अभिजित का विशेष उल्लेख है — और इसे देवताओं का प्रिय नक्षत्र कहा गया है।

४. योग (Yoga) — सूर्य और चंद्र की संयुक्त गति

योग सूर्य और चंद्रमा की देशांतरों का योग (Sum of Longitudes) है।

जब यह योग 13 अंश 20 कला बढ़ता है — एक योग पूरा होता है।

27 योग होते हैं — कुछ शुभ, कुछ अशुभ।

शुभ योग अशुभ योग
सिद्धि व्यतिपात
शुभ वज्र
शुक्ल परिघ
ब्रह्म विष्कुम्भ

विष्कुम्भ, व्यतिपात, परिघ, वज्र — ये विशेष रूप से अशुभ माने जाते हैं। इन योगों में शुभ कार्य नहीं किए जाते।

५. करण (Karana) — तिथि का आधा

एक तिथि के दो भाग होते हैं — प्रत्येक भाग एक करण है।

11 करण होते हैं — 4 स्थिर (Fixed) और 7 चर (Movable)।

चर करण — बव, बालव, कौलव, तैतिल, गर, वणिज, विष्टि। स्थिर करण — शकुनि, चतुष्पाद, नाग, किस्तुघ्न।

विष्टि करण को भद्रा भी कहते हैं — यह अशुभ माना जाता है। भद्रा में शुभ कार्य वर्जित हैं।

हिंदी महीनों के नाम — कहाँ से आए?

Names of Hindi Months — Their Origin

यह एक अत्यंत सुंदर और कम जानी गई बात है।

हिंदी महीनों के नाम उस नक्षत्र से आते हैं जिसमें उस महीने की पूर्णिमा होती है।

मास नक्षत्र अंग्रेज़ी माह (लगभग)
चैत्र (Chaitra) चित्रा (Chitra) मार्च-अप्रैल
वैशाख (Vaishakh) विशाखा (Vishakha) अप्रैल-मई
ज्येष्ठ (Jyeshtha) ज्येष्ठा (Jyeshtha) मई-जून
आषाढ़ (Ashadha) पूर्वाषाढ़ा / उत्तराषाढ़ा जून-जुलाई
श्रावण (Shravan) श्रवण (Shravana) जुलाई-अगस्त
भाद्रपद (Bhadrapad) पूर्वभाद्रपदा / उत्तरभाद्रपदा अगस्त-सितंबर
आश्विन (Ashwin) अश्विनी (Ashwini) सितंबर-अक्टूबर
कार्तिक (Kartik) कृत्तिका (Krittika) अक्टूबर-नवंबर
मार्गशीर्ष (Margashirsha) मृगशिरा (Mrigashira) नवंबर-दिसंबर
पौष (Pausha) पुष्य (Pushya) दिसंबर-जनवरी
माघ (Magha) मघा (Magha) जनवरी-फरवरी
फाल्गुन (Phalguna) पूर्वफाल्गुनी / उत्तरफाल्गुनी फरवरी-मार्च

उदाहरण — श्रावण मास की पूर्णिमा श्रवण नक्षत्र में होती है — इसीलिए उस मास का नाम श्रावण है। कार्तिक मास की पूर्णिमा कृत्तिका नक्षत्र में होती है — इसीलिए कार्तिक।

यह नामकरण लाखों वर्षों के खगोलीय अवलोकन का फल है। प्रत्येक मास का नाम आकाश के एक तारे से जुड़ा है।

चंद्र-मास और सौर वर्ष का अंतर

The Gap Between Lunar Month and Solar Year

एक चंद्र-मास (Lunar Month) — एक अमावस्या से अगली अमावस्या तक — लगभग 29.5 दिन का है।

12 चंद्र-मास = लगभग 354 दिन।

एक सौर वर्ष (Solar Year) = लगभग 365.25 दिन।

अंतर = लगभग 11 दिन प्रति वर्ष।

यह अंतर यदि ठीक न किया जाए — तो कुछ वर्षों में चैत्र मास — जो वसंत में आना चाहिए — शीत ऋतु में आने लगेगा। त्योहार ऋतुओं से अलग हो जाएंगे।

भारतीय पंचांग ने इसका एक सुंदर समाधान निकाला —

अधिक मास — Extra Month

Adhika Maas — The Leap Month

हर 2 से 3 वर्ष में जब यह संचित अंतर लगभग एक पूरे चंद्र-मास के बराबर हो जाता है — तो एक अतिरिक्त मास (Extra Month) जोड़ा जाता है।

इसे अधिक मास (Adhika Maas) कहते हैं — जिसे मलमास या पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है।

कब आता है — जब किसी चंद्र-मास में कोई सौर संक्रांति (Solar Ingress) न हो — अर्थात् सूर्य उस पूरे महीने में कोई नई राशि न बदले — वह मास अधिक मास बन जाता है।

धार्मिक महत्त्व — अधिक मास को भगवान विष्णु के साथ जोड़ा गया है — इसीलिए इसे पुरुषोत्तम मास भी कहते हैं। इस मास में धार्मिक कार्य — पाठ, दान, व्रत — विशेष फलदायी माने जाते हैं। पर विवाह, गृहप्रवेश जैसे शुभ कार्य इसमें नहीं किए जाते।

अधिक मास कितनी बार — लगभग हर 32-33 महीने में एक बार।

क्षय मास — The Rare Lost Month

Kshaya Maas — The Extremely Rare Phenomenon

यह अत्यंत दुर्लभ घटना है।

क्षय मास (Kshaya Maas) — वह चंद्र-मास जिसमें दो सौर संक्रांतियाँ हो जाती हैं — अर्थात् सूर्य उस एक चंद्र-मास में दो राशियाँ बदल लेता है।

ऐसे में वह चंद्र-मास किसी नाम का दावा नहीं कर सकता — और उसे क्षय (Absorbed / Lost) माना जाता है।

कितना दुर्लभ — क्षय मास लगभग 19 वर्षों में एक बार ही आता है।

विशेष नियम — जब क्षय मास आता है — उससे पहले और बाद में अधिक मास भी आता है। इसलिए एक ही वर्ष में दो अधिक मास और एक क्षय मास — यह अत्यंत विशेष संयोग है।

घटना आवृत्ति विशेषता
अधिक मास (Adhika Maas) हर 32-33 महीने एक अतिरिक्त मास जुड़ता है
क्षय मास (Kshaya Maas) हर ~19 वर्ष एक मास लुप्त होता है

हिंदू त्योहार हर वर्ष अलग तारीख पर क्यों?

Why Do Hindu Festivals Fall on Different Dates Every Year?

यह प्रश्न अक्सर पूछा जाता है।

उत्तर सरल है —

हिंदू त्योहार तिथि और नक्षत्र पर आधारित हैं — अंग्रेज़ी तारीख पर नहीं।

दीपावली कार्तिक अमावस्या को है। होली फाल्गुन पूर्णिमा को। जन्माष्टमी श्रावण कृष्ण अष्टमी को।

ये तिथियाँ चंद्रमा की गति से तय होती हैं — जो अंग्रेज़ी सौर कैलेंडर से मेल नहीं खाती।

इसीलिए दीपावली कभी अक्टूबर में है, कभी नवंबर में। पर वह सदा कार्तिक अमावस्या को होती है — यह नहीं बदलता।

भारतीय पंचांग यह सुनिश्चित करता है कि त्योहार अपनी ऋतु और खगोलीय स्थिति से जुड़े रहें — चाहे अंग्रेज़ी तारीख कुछ भी हो।

पंचांग और कुंडली — संबंध

Panchanga and Kundli — The Connection

पंचांग और कुंडली एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।

जन्म-कुंडली एक विशेष व्यक्ति के जन्म के क्षण का पंचांग है — उस क्षण की तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण।

मुहूर्त — किसी शुभ कार्य के लिए पंचांग के आधार पर सर्वोत्तम समय निकालना।

गोचर — आज का पंचांग और जन्म-कुंडली का मिलान।

इसीलिए एक सच्चा ज्योतिषी पंचांग के बिना अधूरा है।

JyotishTara पर देखें — अपनी जन्म-कुंडली में वार, तिथि, और नक्षत्र देखें। यह आपके जन्म के दिन का पंचांग है।

संक्षेप में — मुख्य बातें

पंचांग के पाँच अंग हैं — वार, तिथि, नक्षत्र, योग, करण

वार — सात दिन, सात ग्रह। यही नाम पूरी दुनिया में हैं

तिथि — सूर्य-चंद्र का 12° कोण = एक तिथि। 15 तिथियाँ एक पक्ष में

नक्षत्र — चंद्रमा की दैनिक स्थिति। 27 नक्षत्र, सवा दो दिन में एक

हिंदी मासों के नाम — उस मास की पूर्णिमा के नक्षत्र से आते हैं

अधिक मास — हर 32-33 महीने में - 11 दिन के वार्षिक अंतर को ठीक करता है

क्षय मास — हर ~19 वर्ष में — एक मास लुप्त होता है

हिंदू त्योहार तिथि पर आधारित हैं — इसीलिए अंग्रेज़ी तारीख हर वर्ष बदलती है

[ IMAGE PLACEHOLDER — पंचांग के पाँच अंग — Five limbs of Panchanga with examples ] [ IMAGE PLACEHOLDER — हिंदी मास और नक्षत्र — Hindi months with corresponding Nakshatras ] [ IMAGE PLACEHOLDER — अधिक मास — Lunar vs Solar calendar showing the 11-day gap ]